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Ram and Hanuman: चैत्र मास में क्यों खास है स्वामी और सेवक का यह जन्मोत्सव ?

चैत्र महीना का यह अनुपम संयोग ही है कि जहाँ एकतरफ मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, वहीँ दूसरी तरफ संकटमोचन महावीर भी हैं ।


हमारी भारतीय काल गणना के अनुसार चैत्र का महीना केवल नए संवत की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह भक्ति और शक्ति के मिलन का साक्षी भी है। चैत का महीना बड़ा ही पावन है। कहते हैं भगवान ब्रह्माजी ने इसी चैत महीने में कॉस्मॉस के क्रिएशन की शुरुआत की थी यानी कॉस्मॉस जिसमें स्टार्स, प्लेनेट और टाइम.. यानि सृष्टि आरम्भ ...

 यह संयोग सच मे अद्भुत है कि जिस महीने में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने जन्म लिया, उसी महीने की पूर्णिमा को उनके सबसे प्रिय सेवक, संकटमोचन हनुमान जी का भी प्राकट्य हुआ।

एक का 'नवमी', दूसरे का 'पूर्णिमा'

चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथी को अयोध्या के राजभवन में राम लला का आगमन हुआ, तो ठीक छह दिन बाद पूर्णिमा के दिन केसरी नंदन हनुमान जी ने इस धरा पर अवतार लिया। एक तरफ वह तिथि है जब सूर्य अपनी उच्च राशि में होकर तपता है Ram Navmi, और दूसरी तरफ वह तिथि है जब चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ शीतलता प्रदान करता है (Hanuman Jayanti)। यह बतलाता है कि जहाँ राम 'धर्म' का सूर्य हैं, वहीं हनुमान उस धर्म को अपने हृदय में बसाने वाली 'भक्ति' की पूर्णता हैं।

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सेवक और स्वामी का अटूट रिश्ता

द्वैत अद्वैत में बिना उलझे अपने अन्तःकरण में निरीक्षण करोगे तो भिन्नता नहीं आएगी। इसलिए अध्यात्म में कहा जाता है कि राम और हनुमान को अलग करके नहीं देखा जा सकता। यदि श्री राम साध्य हैं, तो हनुमान जी उस साध्य तक पहुँचने का साधन। हनुमान जी ने अपना पूरा अस्तित्व अपने आराध्य के चरणों में अर्पित कर दिया। शायद इसीलिए नियति ने भी इनके जन्मोत्सव के लिए एक ही महीने का चुनाव किया, ताकि भक्त पहले अपने भगवान का स्वागत करें और फिर उस महान भक्त का, जिसने राम-काज के लिए ही अपना जीवन जिया।

आज के समय में महत्व

आज जब हम हनुमान जयंती मना रहे हैं, तो हमें इस बात पर अवश्य गौर करना चाहिए कि हनुमान जी की शक्ति का स्रोत 'राम नाम' ही है। और तभी तो सभी संतगणों ने भी कहा कि इस कलिकाल में भव से पार उतारने वाला राम का नाम ही है। तुलसी बाबा कहते हैं-

राम ही केवल प्रेम पियारा,

सुमरि सुमरि नर उतरहीं पारा।

चैत का यह महीना हमें सिखाता है कि शक्ति (Hanuman) हमेशा मर्यादा (Ram) के अधीन होनी चाहिए। बिना राम के हनुमान की शक्ति अधूरी है और बिना हनुमानजी के रामजी की लीला।

जय श्री राम! जय हनुमान 🙏

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